अखिल कुमार: भारतीय मुक्केबाज़ी का गौरव
परिचय
अखिल कुमार भारतीय मुक्केबाज़ी का एक प्रमुख नाम हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उनका जन्म 27 मार्च 1981 को अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ था। अपने विशिष्ट "ओपन गार्डेड" मुक्केबाज़ी शैली के कारण वे भारतीय बॉक्सिंग जगत में अलग पहचान रखते हैं। अखिल कुमार ने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और देश को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदकों से नवाज़ा।
प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत
अखिल कुमार का बचपन सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में बीता। उन्हें बचपन से ही खेलों में रुचि थी, लेकिन मुक्केबाज़ी में उनकी दिलचस्पी विशेष रूप से किशोरावस्था में विकसित हुई। उन्होंने 1990 के दशक के अंत में मुक्केबाज़ी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया और जल्द ही अपनी प्रतिभा के बल पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में स्थान बनाना शुरू कर दिया।
उनकी पहली बड़ी उपलब्धि 1999 में आई जब उन्होंने YMCA जूनियर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि ने उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और उनके लिए आगे के दरवाजे खोल दिए।
प्रमुख उपलब्धियाँ
अखिल कुमार ने अपने करियर के दौरान कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लिया और भारत के लिए गौरव हासिल किया। उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
1. 2004 एथेंस ओलंपिक
अखिल कुमार ने 2004 एथेंस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, लेकिन पहले दौर में ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस अनुभव ने उन्हें आगे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
2. 2005 कॉमनवेल्थ फेडरेशन बॉक्सिंग चैंपियनशिप
2005 में ग्लासगो, स्कॉटलैंड में आयोजित 4वीं कॉमनवेल्थ फेडरेशन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अखिल कुमार ने 54 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के बॉक्सर बोंगानी महलांगू को 18-17 के करीबी अंतर से हराया।
3. 2006 मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स
यह अखिल कुमार के करियर का एक सुनहरा दौर था। उन्होंने मेलबर्न में आयोजित 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। इस प्रतियोगिता में उन्होंने फाइनल मुकाबले में मॉरीशस के ब्रूनो जूली को हराया। इस जीत ने उन्हें देशभर में प्रसिद्ध कर दिया।
4. 2007 एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप
2007 में उलान बतोर, मंगोलिया में आयोजित एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में अखिल कुमार ने कांस्य पदक जीता।
5. 2008 बीजिंग ओलंपिक
अखिल कुमार ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में भाग लिया और शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले दौर में फ्रांस के अली हलाब को 12-5 के अंतर से हराया। इसके बाद उन्होंने विश्व चैंपियन सर्गेई वोडोप्यानोव को मात दी। हालांकि, वह क्वार्टर फाइनल में वियास्लाव गोजन के खिलाफ हार गए। इसके बावजूद, उनका प्रदर्शन भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया।
6. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार
2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
तीन बार "सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज़" का पुरस्कार प्राप्त किया।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 12 स्वर्ण, 1 रजत और 4 कांस्य पदक जीते।
भारतीय मुक्केबाज़ी में योगदान
अखिल कुमार न केवल एक सफल मुक्केबाज़ रहे हैं, बल्कि उन्होंने युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने और भारतीय मुक्केबाज़ी को एक नई ऊँचाई पर ले जाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
1. कोचिंग और मार्गदर्शन
मार्च 2017 में, भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने उन्हें राष्ट्रीय मुक्केबाज़ी पर्यवेक्षक नियुक्त किया। इस भूमिका में उन्होंने भारतीय मुक्केबाज़ों को प्रशिक्षण देने और खेल की बेहतरी के लिए कई प्रयास किए।
2. हरियाणा पुलिस सेवा
अखिल कुमार वर्तमान में हरियाणा पुलिस सेवा में उप पुलिस अधीक्षक (DSP) के पद पर कार्यरत हैं।
3. खेल प्रबंधन और चयन समिति
2012: अर्जुन पुरस्कार और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार चयन समिति सदस्य।
2013: भीम पुरस्कार चयन समिति सदस्य।
2017-2019: "खेलो इंडिया" योजना के तहत "टैलेंट आइडेंटिफिकेशन एंड डेवलपमेंट कमेटी" के सदस्य।
राष्ट्रीय एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) के पैनल सदस्य रहे।
ह्रदय स्पर्शी गौरवशाली पल!
कल का दिन मेरे लिए अविस्मरणीय था। मैं वैश्य महाविद्यालय भिवानी का एक भूतपूर्व विद्यार्थी, कल अपने उसी महाविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुआ। यह मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का क्षण था।
जब मैं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों से मिल रहा था तब मेरी आँखों के सामने मेरी युवावस्था के वे दिन जीवंत हो उठे, जब मैं इसी कॉलेज के मैदान में पसीना बहाया करता था I
मैं यहाँ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर अभिभूत था। यह मेरे लिए एक भावनात्मक पल था, जब मैं अपने अतीत और वर्तमान को एक साथ देख रहा था। मैंने इन युवा खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए उन्हें यह बताया कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
मैंने अपने जीवन में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन अपने महाविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना, किसी उपलब्धि से कम नहीं है।
मैं अपने महाविद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे यह अवसर प्रदान किया। मैं आशा करता हूँ कि मेरे शब्द इन युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगे और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
यह मेरे लिए एक ऐसा अनुभव है, जिसे मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। यह मेरे लिए एक गौरवशाली पल है, जो मेरे हृदय में सदैव अंकित रहेगा ।
क्यूँ तेरी यादे अब भी मेरा पीछा करती है,
ये प्यार नहीं तो और क्या है…..
अखिल कुमार भारतीय मुक्केबाज़ी के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से न केवल अपने करियर को ऊँचाई दी, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल भी कायम की। उनकी उपलब्धियाँ और योगदान भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर हैं। वे न केवल एक महान मुक्केबाज़ हैं, बल्कि एक आदर्श गुरु और प्रेरणास्त्रोत भी हैं।
खेल पर्यवेक्षक:- संजीव दत्ता
समन्वयक :- सपना दत्ता
दूरभाष :- 9971999864
प्रायोजन के लिए /For sponsorship : khelkhiladi55@gmail.com
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