भारत में खेलों का विकसित होता स्वरूप और राष्ट्र निर्माण में उनकी बढ़ती भूमिका
भारत में खेलों का विकसित होता स्वरूप और राष्ट्र निर्माण में उनकी बढ़ती भूमिका
— संजीव दत्ता
मैं, संजीव दत्ता, एक राष्ट्रीय स्तर का मुक्केबाजी पदक विजेता, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) से प्रशिक्षक कोर्स में A ग्रेड उत्तीर्ण, तथा दूरदर्शन पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का कमेंटेटर होने के नाते, भारत के खेल परिदृश्य को खिलाड़ी, प्रशिक्षक और विश्लेषक तीनों दृष्टिकोणों से देखने का अवसर प्राप्त हुआ है। अपने इस अनुभव के आधार पर मैं यह दृढ़ता से कह सकता हूँ कि भारत में खेलों का स्वरूप अब तेज़ी से विकसित हो रहा है और आने वाले समय में खेल राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक विकास में एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरेंगे।
भारत में खेलों की वर्तमान संरचना और भूमिका
आज भारत में 50 से अधिक राष्ट्रीय खेल महासंघ (National Sports Federations) कार्यरत हैं, जिनमें से बड़ी संख्या को युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से वार्षिक मान्यता प्राप्त है। ये महासंघ विभिन्न खेलों में प्रतिभा की पहचान, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी निभाते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में खेल संघों में पारदर्शिता, समयबद्ध चुनाव और प्रशासनिक सुधार पर विशेष बल दिया गया है। यह सुधार आवश्यक भी है, क्योंकि मजबूत खेल प्रशासन के बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता संभव नहीं।
राष्ट्रीय खेल नीति 2025: भारत के खेल भविष्य की नींव
भारत सरकार द्वारा स्वीकृत राष्ट्रीय खेल नीति 2025 देश के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इस नीति का उद्देश्य है:
भारत को 2047 तक एक अग्रणी खेल राष्ट्र बनाना
2036 ओलंपिक जैसे वैश्विक आयोजनों की तैयारी
खेलों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ना
खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करना
यह नीति खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास के साधन के रूप में स्थापित करती है।
खेलो इंडिया: जमीनी स्तर से प्रतिभा निर्माण
खेलो इंडिया योजना ने भारत में खेल संस्कृति को जन-आंदोलन का रूप दिया है। इस योजना के अंतर्गत:
स्कूल और कॉलेज स्तर पर प्रतियोगिताएँ
खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से स्थानीय प्रशिक्षण
पारंपरिक और ग्रामीण खेलों को प्रोत्साहन
खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति और संरचित मार्गदर्शन
एक प्रशिक्षक के रूप में मेरा अनुभव कहता है कि खेलो इंडिया ने छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने का आत्मविश्वास दिया है।
अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत की बढ़ती उपस्थिति
पिछले एक दशक में भारत का प्रदर्शन ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार बेहतर हुआ है। मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, कुश्ती, हॉकी, शूटिंग और पैरा-स्पोर्ट्स में भारतीय खिलाड़ियों ने दुनिया को अपनी क्षमता का परिचय दिया है।
एक कमेंटेटर के रूप में, जब मैं अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की कमेंट्री करता हूँ, तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि भारतीय खिलाड़ी अब तकनीक, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती में विश्व स्तर के एथलीटों के समकक्ष खड़े हैं।
खेल और राष्ट्र निर्माण: एक मजबूत संबंध
खेल आज केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं रहे, बल्कि वे:
युवाओं को अनुशासन और नेतृत्व सिखाते हैं
स्वास्थ्य और फिटनेस को बढ़ावा देते हैं
रोज़गार, पर्यटन और खेल उद्योग को विकसित करते हैं
देश की वैश्विक पहचान और सॉफ्ट पावर को मज़बूत करते हैं
एक खिलाड़ी के रूप में मैंने सीखा कि खेल चरित्र निर्माण करते हैं, और एक प्रशिक्षक के रूप में देखा कि खेल समाज को दिशा देते हैं।
आगे की राह: क्या और करने की आवश्यकता है
हालाँकि प्रगति उल्लेखनीय है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में और प्रयास ज़रूरी हैं:
खेल संघों में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही
प्रशिक्षकों और रेफरी के लिए निरंतर उन्नयन कार्यक्रम
खेल विज्ञान, डेटा विश्लेषण और मानसिक प्रशिक्षण पर निवेश
खिलाड़ियों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा और सम्मानजनक करियर विकल्प
निष्कर्ष
आज यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि भारत में खेलों का स्वरूप बदल रहा है। सरकार की नीतियाँ, खेल संघों की जिम्मेदारी, प्रशिक्षकों की मेहनत और खिलाड़ियों की लगन इन सबके सम्मिलित प्रयास से खेल अब राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल खेल प्रतियोगिताओं में, बल्कि खेल संस्कृति और खेल नेतृत्व में भी विश्व को दिशा दिखाने वाला देश बनेगा।
खेल पर्यवेक्षक:- संजीव दत्ता
समन्वयक :- सपना दत्ता
दूरभाष :- 9971999864
प्रायोजन के लिए /For sponsorship : khelkhiladi55@gmail.com
बहुत सुंदर तरीके से आप ने इतना सही आकलन किया है। बधाई 🙏
ReplyDeleteआभार आदरणीय
ReplyDeleteबहुत बहुत बधाई आपको इस ख़ुबसूरत तर्ज़िये के लिए। एक बेहतरीन कमेंटेटर के साथ - साथ खेलों और खिलाड़ियों पर अपनी पैनी निगाह रखकर भारतीय खेलों के बदले स्वरूप पर आपका यह आलेख सराहनीय है।
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