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ललित प्रसाद संघर्ष से शिखर तक और अब भारतीय मुक्केबाजी के पदक-शिल्पकार

ललित प्रसाद संघर्ष से शिखर तक और अब भारतीय मुक्केबाजी के पदक-शिल्पकार

 


भारतीय मुक्केबाजी आज जिस ऊंचाई की ओर बढ़ रही है, उसके पीछे केवल रिंग में पदक जीतने वाले मुक्केबाजों का ही योगदान नहीं है, बल्कि उन समर्पित प्रशिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, जो वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर खिलाड़ियों को सफलता के लिए तैयार करते हैं। ललित प्रसाद ऐसे ही अनुभवी और समर्पित प्रशिक्षक हैं, जिन्होंने स्वयं रिंग में संघर्ष किया, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और बाद में प्रशिक्षक के रूप में भारतीय मुक्केबाजी की नई पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तराखंड की धरती से निकलकर मुक्केबाजी की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले ललित प्रसाद की यात्रा संघर्ष, अनुशासन, निरंतर सीखने और समर्पण की कहानी है। पढ़ाई के साथ उन्होंने वर्ष 1986 में मुक्केबाजी शुरू की। नैनीताल में उन्हें अपने प्रारंभिक गुरु श्री मुखर्जी निर्वाण जी का मार्गदर्शन मिला। इसके बाद देवेंद्र भट्ट, जगदीश चंद, SAI के राजकुमार, राष्ट्रीय स्तर पर एन.के. भट्ट और अजीत चौधरी जैसे प्रशिक्षकों से उन्हें सीखने का अवसर मिला। दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में .पी. भारद्वाज और एस.आर. सिंह जैसे भारतीय मुक्केबाजी के दिग्गजों का मार्गदर्शन भी उनके खेल जीवन में महत्वपूर्ण रहा। ललित प्रसाद ने वर्ष 1988 में उत्तर प्रदेश की ओर से अपना पहला सीनियर राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप खेला। उस समय उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एक ही राज्य का हिस्सा थे। आगे चलकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। उनके खेल जीवन की उल्लेखनीय उपलब्धियों में 1994 के पुणे राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक और 1995, 1996, 1997, 1998 तथा 1999 की राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2001 की सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक भी हासिल किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1995 बीजिंग इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कांस्य, 1995 SAF Games में रजत, 1996 YMCA इंटरनेशनल में कांस्य, 1997 प्रेसिडेंट कप में कांस्य और YMCA इंटरनेशनल में स्वर्ण तथा 1998 YMCA इंटरनेशनल में स्वर्ण पदक उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में शामिल हैं। 1999 के इंडो-मॉरीशस टूर्नामेंट में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। उत्तर रेलवे से जुड़ने के बाद उनका खेल और खेल जीवन और अधिक मजबूत हुआ। उनके अनुसार उन्होंने रेलवे की ओर से आठ बार राष्ट्रीय चैंपियन और 11 बार इंटर-रेलवे चैंपियन बनने की उपलब्धि हासिल की। खिलाड़ी के रूप में प्राप्त अनुभव आगे चलकर उनके कोचिंग जीवन की सबसे बड़ी ताकत बना।

वर्ष 2005 में ललित प्रसाद ने बॉक्सिंग में NIS स्पोर्ट्स कोचिंग डिप्लोमा A’ ग्रेड के साथ पूरा किया। इसके बाद उनका जीवन पूरी तरह प्रशिक्षण और भारतीय मुक्केबाजी को नई प्रतिभाएं देने के लिए समर्पित हो गया। उन्होंने 2005 से राष्ट्रीय स्तर के एलीट पुरुष और युवा मुक्केबाजी शिविरों में अपनी लंबी भागीदारी दर्ज की है।




एक खिलाड़ी के रूप में जिस संघर्ष और दबाव को उन्होंने स्वयं महसूस किया था, वही अनुभव उन्होंने अपने खिलाड़ियों को तैयार करने में इस्तेमाल किया। तकनीक, फिटनेस, मानसिक मजबूती, रिंग रणनीति और मुकाबले की परिस्थितियों को समझने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक अनुभवी प्रशिक्षक के रूप में स्थापित किया। ललित प्रसाद ने भारतीय युवा और एलीट टीमों के साथ अनेक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कोच के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इनमें यूथ कॉमनवेल्थ गेम्स, यूथ विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप, यूथ एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप, स्ट्रांजा कप, उलानबातर कप, एलीट विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप, केमी पोकेल विश्व कप, एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप, GeeBee इंटरनेशनल टूर्नामेंट और अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगिताएं शामिल हैं। उनके प्रशिक्षित मुक्केबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए। 2016 यूथ विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्ण और कांस्य पदक जीते, जबकि 2017 एलीट विश्व चैंपियनशिप में भारत को कांस्य पदक मिला। 2018 Chemiey Pokal में भारतीय मुक्केबाजों ने दो स्वर्ण पदक भी हासिल किए। 2019 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारतीय टीम के प्रदर्शन में एक स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक का योगदान दर्ज है।

मुक्केबाजी में केवल खिलाड़ी की तकनीक ही नहीं, बल्कि मुकाबले के दौरान उसकी सुरक्षा और त्वरित चिकित्सा प्रबंधन भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। ललित प्रसाद ने वर्ष 2017 में AIBA Cutman Course पूरा कर अपनी विशेषज्ञता को और विस्तार दिया। इसी वर्ष 2017 उन्होंने Strength & Conditioning Course भी किया। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग शिक्षा को आगे बढ़ाया और IBA के 1-Star, 2-Star तथा 3-Star Coaching Courses पूरे किए। उनका 3-Star कोचिंग कोर्स दुबई में पूरा करना उनके निरंतर सीखने और स्वयं को आधुनिक मुक्केबाजी की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ललित प्रसाद की कोचिंग यात्रा केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने राष्ट्रीय शिविरों में लगातार खिलाड़ियों को तैयार किया। उनके अनुभव का दायरा युवा मुक्केबाजों से लेकर एलीट पुरुष टीम तक फैला हुआ है। उन्होंने वर्ष 2005 से लेकर 2021 तक विभिन्न राष्ट्रीय कोचिंग शिविरों में अपनी निरंतर भागीदारी दर्ज की और 2022 से 2026 तक भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम के साथ उनकी उपस्थिति दर्ज है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022, स्ट्रांजा कप, एलोर्डा कप, थाईलैंड ओपन, Boxam Elite और World Boxing Cup जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में उनका अनुभव भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति है।


खेल और कोचिंग में उनकी सेवाओं को रेलवे तथा सरकार की ओर से भी सम्मान मिला। उन्हें 1994 में दिल्ली के मुख्यमंत्री पुरस्कार, 1996 में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विशिष्ठ रेल सेवा पुरस्कार,  एवं 1996-97 में Best Sportsperson Indian Railways और रेलवे मंत्रालय से उत्कृष्ट खेल सेवाओं के लिए प्रशंसा पत्र प्राप्त हुआ। प्रशिक्षक के रूप में 2012 में महाप्रबंधक विशिष्ठ रेल सेवा पुरस्कार और 2013 में रेलवे मंत्रालय का राष्ट्रीय स्तर का Outstanding Services in Sports Award भी मिला। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा 2015 में भी उन्हें सम्मानित किया गया।

अब ललित प्रसाद के सामने एक और महत्वपूर्ण चुनौती है। आगामी एशियाई खेलों में वह भारतीय मुक्केबाजी टीम के कोच की भूमिका निभाने जा रहे हैं। यह जिम्मेदारी उनके लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि लगभग चार दशक की मुक्केबाजी यात्रा की अगली महत्वपूर्ण परीक्षा है। भारतीय मुक्केबाजी दल से इस बार देश को बहुत बड़ी उम्मीदें हैं। रिंग में उतरने वाले मुक्केबाजों से पदक की अपेक्षा है, लेकिन उन पदकों के पीछे रणनीति तैयार करने, खिलाड़ियों की कमियों को पहचानने, मानसिक रूप से तैयार करने और मुकाबले के निर्णायक क्षणों में सही दिशा देने वाले कोचों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। ललित प्रसाद का अनुभव इस मोर्चे पर भारतीय टीम की बड़ी ताकत बन सकता है। स्वयं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके ललित प्रसाद जानते हैं कि बड़े मंच पर मुकाबला केवल मुक्कों की ताकत से नहीं जीता जाता इसके लिए धैर्य, रणनीति, फिटनेस, आत्मविश्वास और सही समय पर सही निर्णय की आवश्यकता होती है। ललित प्रसाद का लक्ष्य केवल आगामी एशियाई खेलों तक सीमित नहीं है। वर्ष 2005 से राष्ट्रीय मुक्केबाजी शिविरों का हिस्सा रहे इस अनुभवी कोच का स्पष्ट उद्देश्य भारतीय मुक्केबाजी को लगातार मजबूत करना और 2028 ओलंपिक में भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतने वाली टीम तैयार करना है। उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि एक खिलाड़ी जब अपने अनुभव को अगली पीढ़ी के निर्माण में लगा देता है, तो उसका योगदान व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं बड़ा हो जाता है। रिंग में एक समय स्वयं पदक के लिए लड़ने वाले ललित प्रसाद आज खिलाड़ियों को पदक तक पहुंचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

उत्तराखंड से शुरू हुई यह मुक्केबाजी यात्रा अब भारतीय रिंग की बड़ी उम्मीदों का हिस्सा बन चुकी है। एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाज जब पदक के लिए रिंग में उतरेंगे, तो उनके साथ ललित प्रसाद का अनुभव, संघर्ष और वर्षों की साधना भी खड़ी होगी।



लेखक :-  संजीव दत्ता

संपादिका :- डॉ. सपना दत्ता 

दूरभाष :- 9971999864

प्रायोजन के लिए /For sponsorship : khelkhiladi55@gmail.com 

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