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उत्तर रेलवे की गौरवशाली खेल विरासत का स्वर्णिम अध्याय

उत्तर रेलवे की गौरवशाली खेल विरासत का स्वर्णिम अध्याय

 


एशियन गेम्स 2026 में कबड्डी और हॉकी के 7 खिलाड़ी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

भारतीय रेल को देश की जीवनरेखा कहा जाता है। प्रतिदिन करोड़ों लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने वाली भारतीय रेल ने केवल परिवहन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि देश की खेल प्रतिभाओं को पहचान देने, उन्हें अवसर प्रदान करने तथा राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्तर रेलवे के लिए यह अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि उसके सात प्रतिभाशाली खिलाड़ी एशियन गेम्स 2026 में भारतीय टीमों का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। इनमें कबड्डी के जयदीप दहिया, आशु मलिक एवं पूजा काजला, जबकि हॉकी में पुरुष खिलाड़ी यशदीप सिवाच तथा महिला खिलाड़ी नेहा, शिल्पी डबास एवं साक्षी राणा शामिल हैं।

यह उपलब्धि केवल इन खिलाड़ियों की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उत्तर रेलवे की उस सुदृढ़ और गौरवशाली खेल संस्कृति का प्रमाण है, जिसने वर्षों से देश को अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी प्रदान किए हैं। उत्तर रेलवे की खेल परंपरा में कबड्डी, हॉकी, कुश्ती, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स जैसे खेलों ने विशेष रूप से भारतीय खेल जगत को गौरवान्वित किया है। आज की युवा पीढ़ी के खिलाड़ी जयदीप दहिया, आशु मलिक, पूजा काजला, यशदीप सिवाच, नेहा, शिल्पी डबास और साक्षी राणा अपनी प्रतिभा, अनुशासन और संघर्ष के माध्यम से उत्तर रेलवे की उसी गौरवशाली विरासत को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं। कबड्डी में उत्तर रेलवे की नई पहचान भारतीय कबड्डी की मजबूत रक्षात्मक दीवार भारतीय पुरुष कबड्डी टीम के प्रमुख डिफेंडरों में शामिल जयदीप दहिया ने अपनी मजबूत पकड़, सटीक टैकलिंग, सुपर टैकल और दबावपूर्ण परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन के माध्यम से विशेष पहचान बनाई है। प्रो कबड्डी लीग में हरियाणा स्टीलर्स का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अपनी रक्षात्मक क्षमता और नेतृत्व कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। कप्तानी की जिम्मेदारी निभाते हुए भी उन्होंने टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। एशियन गेम्स 2026 में उनका चयन भारतीय टीम की रक्षात्मक पंक्ति को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। भारतीय कबड्डी के आक्रामक सितारे प्रतिभाशाली रेडर आशु मलिक आज भारतीय कबड्डी के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। प्रो कबड्डी लीग में दबंग दिल्ली के.सी. का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अपनी तेज गति, शानदार फुटवर्क, डू-ऑर-डाई रेड में आत्मविश्वास और लगातार अंक अर्जित करने की क्षमता से कबड्डी जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। एक प्रो कबड्डी लीग सत्र में 276 रेड अंक अर्जित कर उन्होंने अपनी असाधारण क्षमता का परिचय दिया तथा “Raider of the Season” सम्मान भी प्राप्त किया। उनका खेल आधुनिक कबड्डी की गति, तकनीक और आक्रामकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। महिला कबड्डी की उभरती प्रतिभा पूजा काजला का चयन उत्तर रेलवे के लिए विशेष गौरव का विषय है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि उत्तर रेलवे पुरुष खिलाड़ियों के साथ-साथ महिला खेल प्रतिभाओं को भी समान रूप से अवसर, प्रोत्साहन और मंच प्रदान कर रहा है।

एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका चयन युवा महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है और उत्तर रेलवे की महिला कबड्डी परंपरा को नई पहचान प्रदान करता है। कबड्डी की गौरवशाली विरासत उत्तर रेलवे के लिए यह पहला अवसर नहीं है जब उसके खिलाड़ियों ने भारतीय कबड्डी टीम में स्थान बनाकर देश और रेलवे का नाम रोशन किया हो। उत्तर रेलवे की कबड्डी परंपरा गौरव, संघर्ष और उपलब्धियों की एक अमिट गाथा रही है। इस गौरवशाली सूची में रणधीर सिंह, संजीव कुमार, राकेश कुमार और मंजीत छिल्लर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के नाम विशेष सम्मान के साथ लिए जाते हैं। भारतीय कबड्डी के महान ऑलराउंडर राकेश कुमार भारतीय कबड्डी के सबसे प्रतिष्ठित खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए विश्व कप और एशियाई खेलों सहित अनेक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वे 2007 कबड्डी विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता टीम के उप-कप्तान रहे तथा 2006, 2010 और 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उनकी उत्कृष्ट खेल उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2011 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। भारतीय कबड्डी के उत्कृष्ट ऑलराउंडर मंजीत छिल्लर भारतीय कबड्डी के सबसे सफल और प्रभावशाली ऑलराउंड खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उनकी रक्षात्मक क्षमता, आक्रामक खेल और मैच की परिस्थितियों को समझने की अद्भुत योग्यता उन्हें एक संपूर्ण खिलाड़ी बनाती है। भारतीय कबड्डी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2015 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रणधीर सिंह और संजीव कुमार की प्रेरणादायी विरासत उत्तर रेलवे की कबड्डी विरासत के प्रेरणास्रोत रणधीर सिंह और संजीव कुमार का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। रणधीर सिंह 1990 बीजिंग एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय कबड्डी टीम के सदस्य रहे और उन्हें 1997 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं संजीव कुमार को भारतीय कबड्डी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 2003 में अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया। इन दिग्गज खिलाड़ियों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया, जिसे आज जयदीप दहिया और आशु मलिक जैसे खिलाड़ी आगे बढ़ा रहे हैं।

उत्तर रेलवे की खेल पहचान केवल कबड्डी तक सीमित नहीं है। भारतीय हॉकी के इतिहास में भी उत्तर रेलवे से जुड़े अनेक खिलाड़ियों ने ओलंपिक, विश्व कप, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अन्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का गौरव बढ़ाया है। इस गौरवशाली हॉकी परंपरा में बाल किष्ण सिंह, पृथीपाल सिंह, मोहिंदर लाल, राजेंद्र सिंह, हरबिंदर सिंह, इंदर सिंह, वरिंदर सिंह, अजीत सिंह, अशोक दीवान, मुखबैन सिंह, बलविंदर सिंह और अशोक कुमार जैसे महान खिलाड़ियों का विशेष योगदान रहा है। भारतीय हॉकी के महानतम खिलाड़ियों में शामिल पृथीपाल सिंह ने भारत के लिए ओलंपिक और एशियाई खेलों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं। वे 1960 रोम ओलंपिक की रजत, 1964 टोक्यो ओलंपिक की स्वर्ण तथा 1968 मैक्सिको ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता भारतीय टीमों का हिस्सा रहे। उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। मोहिंदर लाल 1964 टोक्यो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम तथा 1966 बैंकॉक एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे। हरबिंदर सिंह भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 1964 टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण तथा 1968 और 1972 के ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीमों का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया गया। वरिंदर सिंह ने भारतीय हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। वे 1972 म्यूनिख ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता टीम और 1975 हॉकी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली ऐतिहासिक भारतीय टीम के सदस्य रहे। अशोक दीवान और अशोक कुमार भी 1975 हॉकी विश्व कप में भारत की ऐतिहासिक सफलता से जुड़ी गौरवशाली पीढ़ी के महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहे। इसी प्रकार मुखबैन सिंह, इंदर सिंह, बलविंदर सिंह और अन्य खिलाड़ियों ने भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और उत्तर रेलवे का गौरव बढ़ाया।

महिला हॉकी में उत्तर रेलवे की सशक्त पहचान उत्तर रेलवे की महिला हॉकी परंपरा भी अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायी रही है। इस परंपरा में प्रीतम रानी सिवाच, सीता गोसाईं, मंजिंदर कौर और कनिका सिवाच जैसी खिलाड़ियों ने भारतीय महिला हॉकी को नई पहचान दिलाई। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान प्रीतम रानी सिवाच उत्तर रेलवे की गौरवशाली खेल विरासत का महत्वपूर्ण नाम हैं। उन्होंने 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों में रजत पदक तथा 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा खिलाड़ी निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। सीता गोसाईं और मंजिंदर कौर सीता गोसाईं भारतीय महिला हॉकी की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रही हैं और 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। मंजिंदर कौर ने भी भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्णिम सफलता प्राप्त करने वाली भारतीय टीम से जुड़ी रहीं। नई पीढ़ी की प्रतिभा वर्तमान पीढ़ी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी कनिका सिवाच ने भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। वे उत्तर रेलवे की उस नई खेल पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भविष्य में भारतीय हॉकी को और अधिक मजबूती प्रदान करने की क्षमता रखती है।

एशियन गेम्स 2026 में उत्तर रेलवे के हॉकी सितारे यशदीप सिवाच पुरुष हॉकी की नई उम्मीद प्रतिभाशाली डिफेंडर यशदीप सिवाच भारतीय पुरुष हॉकी की नई पीढ़ी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त किया है और उत्तर रेलवे की हॉकी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय टीम में उनका चयन उत्तर रेलवे के लिए विशेष गौरव की बात है। अनुभव और निरंतरता की मिसाल भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी मिडफील्डर नेहा ने लंबे समय तक भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। वे ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और एशिया कप सहित अनेक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं। उनकी उपलब्धियाँ और अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। रक्षा पंक्ति की मजबूत खिलाड़ी शिल्पी डबास भारतीय महिला हॉकी की प्रतिभाशाली डिफेंडर हैं। उत्तर रेलवे में कार्यरत रेलवे स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। भारतीय टीम में उनका चयन उत्तर रेलवे की मजबूत महिला हॉकी व्यवस्था और खिलाड़ी विकास की निरंतर प्रक्रिया का प्रमाण है। युवा प्रतिभा से अंतरराष्ट्रीय मंच तक भारतीय महिला हॉकी की नई पीढ़ी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी साक्षी राणा ने जूनियर स्तर से लेकर सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी तक अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। जूनियर विश्व कप, जूनियर एशिया कप तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने सीनियर भारतीय टीम में भी अपनी पहचान बनाई है। एशियन गेम्स 2026 के लिए उनका चयन उत्तर रेलवे के लिए गर्व का विषय है।

 

 

कुश्ती में उत्तर रेलवे का गौरवशाली योगदान उत्तर रेलवे की खेल परंपरा का एक अत्यंत गौरवशाली अध्याय रही है। उत्तर रेलवे से जुड़े अनेक पहलवानों ने ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश को गौरवान्वित किया है। इस गौरवशाली परंपरा में बिशम्बर पहलवान, नरेश पहलवान, रोहताश पहलवान, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, सुशील कुमार, राजीव तोमर, अनिल मान, कुलदीप मलिक, दिव्या काकरण, सुमित, सत्यवान, सत्यव्रत कादियान और अमन जैसे अनेक नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। बिशम्बर पहलवान भारतीय कुश्ती के प्रारंभिक महान खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं और उनकी सबसे बड़ी पहचान 1964 टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से है। यह उपलब्धि भारतीय कुश्ती और उत्तर रेलवे की खेल विरासत दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारतीय महिला कुश्ती की ऐतिहासिक नायिका साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक 2016 में कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने देश की लाखों बेटियों को खेल के मैदान में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। भारतीय महिला कुश्ती की सशक्त पहचान विनेश फोगाट ने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारतीय महिला कुश्ती को वैश्विक मंच पर एक मजबूत पहचान दिलाई और अपनी उपलब्धियों के लिए अनेक प्रतिष्ठित खेल सम्मानों से सम्मानित हुईं। विश्व मंच पर भारत की मजबूत चुनौती बजरंग पुनिया भारतीय कुश्ती के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक, विश्व चैंपियनशिप तथा एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में उनके शानदार प्रदर्शन ने भारतीय कुश्ती को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। सुशील कुमार ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य और लंदन ओलंपिक 2012 में रजत पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना विशेष स्थान बनाया। राजीव तोमर ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2014 में पुरुष फ्रीस्टाइल 125 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता और 32 बार हिन्द केसरी जितने का  ख़िताब अपने नाम किया और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं और उत्तर रेलवे की गौरवशाली कुश्ती परंपरा को सशक्त बनाया।

मुक्केबाजी में भी उत्तर रेलवे की दमदार पहचान मुक्केबाजी के क्षेत्र में भी उत्तर रेलवे ने देश को अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। जितेंद्र कुमार, मनोज कुमार, अखिल कुमार और विजेंदर सिंह जैसे मुक्केबाजों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और भारतीय रेल का गौरव बढ़ाया। अखिल कुमार ने राष्ट्रमंडल खेलों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारतीय मुक्केबाजी में विशेष पहचान बनाई। विजेंदर सिंह भारतीय मुक्केबाजी के सबसे चर्चित और सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी उपलब्धियों ने भारतीय मुक्केबाजी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मनोज कुमार भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजों में शामिल रहे हैं। उन्होंने लाइट वेल्टरवेट तथा वेल्टरवेट वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों  में स्वर्ण पदक जीता  एशियाई चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

उत्तर रेलवे की खेल विरासत में एथलेटिक्स का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मनजीत भुल्लर, साबिर अली, आर. एस. चौहान, शक्ति सिंह और बक्तावर खंबाटा जैसे एथलीटों ने उत्तर रेलवे और भारत का गौरव बढ़ाया। साबिर अली भारत के प्रसिद्ध डेकाथलॉन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। वे भारतीय एथलेटिक्स टीम के कप्तान भी रहे तथा उत्कृष्ट खेल उपलब्धियों के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुए। उन्होंने खिलाड़ी के रूप में ही नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे और उत्तर रेलवे में कोच के रूप में भी खेलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शक्ति सिंह भारतीय एथलेटिक्स के प्रसिद्ध शॉटपुट खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय एथलेटिक्स में विशेष पहचान दिलाई। वे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं।

उत्तर रेलवे में खेलों की निरंतर प्रगति के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और उत्तर रेलवे खेलकूद संघ के पदाधिकारियों द्वारा खिलाड़ियों को उपलब्ध कराया जा रहा सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर रेलवे खेल संघ के अध्यक्ष एवं प्रमुख मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री राजीव कुमार तथा अवैतनिक महासचिव एवं मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर/परियोजना श्री वाई. एस. गुलेरिया द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने, खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयास उत्तर रेलवे की खेल उपलब्धियों को नई गति प्रदान कर रहे हैं। आज उत्तर रेलवे के खिलाड़ी केवल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ओलंपिक, एशियन गेम्स, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैंपियनशिप और अन्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। गौरवशाली विरासत से स्वर्णिम भविष्य की ओर उत्तर रेलवे की खेल उपलब्धियाँ इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि भारतीय रेल केवल यात्रियों और माल को देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुँचाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि वह देश की खेल प्रतिभाओं को भी सपनों से सफलता और राष्ट्रीय पहचान से अंतरराष्ट्रीय गौरव तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है।

आज जयदीप दहिया, आशु मलिक और पूजा काजला का एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय कबड्डी टीम में चयन तथा यशदीप सिवाच, नेहा, शिल्पी डबास और साक्षी राणा का भारतीय हॉकी टीमों में चयन उत्तर रेलवे की इसी गौरवशाली खेल परंपरा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है। यह उपलब्धि उन महान खिलाड़ियों की विरासत को आगे बढ़ाती है जिन्होंने वर्षों से उत्तर रेलवे की जर्सी पहनकर देश का नाम रोशन किया कबड्डी में रणधीर सिंह, संजीव कुमार, राकेश कुमार और मंजीत छिल्लर; हॉकी में पृथीपाल सिंह, हरबिंदर सिंह, वरिंदर सिंह, अशोक कुमार, प्रीतम रानी सिवाच और सीता गोसाईं; कुश्ती में साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और सुशील कुमार; मुक्केबाजी में जितेंद्र कुमार, अखिल कुमार और विजेंदर सिंह तथा एथलेटिक्स में साबिर अली और शक्ति सिंह जैसे अनेक महान खिलाड़ी। उत्तर रेलवे परिवार को पूर्ण विश्वास है कि एशियन गेम्स 2026 में उत्तर रेलवे के ये सातों खिलाड़ी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन, अनुशासन और संघर्ष के बल पर भारत का तिरंगा और अधिक ऊँचा करेंगे तथा उत्तर रेलवे एवं भारतीय रेल परिवार को एक बार फिर गौरवान्वित करेंगे।

उत्तर रेलवे की पटरियों पर केवल रेलगाड़ियाँ ही नहीं दौड़तीं यहाँ से देश के सपने, संघर्ष, प्रतिभाएँ और स्वर्णिम उपलब्धियाँ भी विश्व मंच तक पहुँचती हैं।


खेल पर्यवेक्षक:-  संजीव दत्ता

दूरभाष :- 9971999864

प्रायोजन के लिए /For sponsorship : khelkhiladi55@gmail.com 

 

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